शख्सियत

पूर्णिया: निर्भीक पत्रकारिता के ‘चिराग’ महावीर लाठ का निधन,कसबा समाज मर्माहत

 KASBA : बेबाक लेखनी के लिए हमेशा चर्चित रहने वाले हिंदी साप्ताहिक चिराग के संपादक महावीर लाठ के निधन से पूरा कसबा समाज मर्माहत है।चिराग के माध्यम से स्वर्गीय लाठ समाज के गरीब,मजदूर, दबे कुचले लोगों का आवाज बने।यही कारण रहा कि चिराग का हर एक अंक हमेशा से चर्चा में रहा।

 तकरीबन 70-80 के दशक में इन्होंने निर्भीक बेबाक पत्रकारिता में एक अलग आयाम स्थापित किया था।जो आज के युवा पत्रकारों के लिये अनुकरणीय हैं।इनकी लेखनी के समाज के सभी लोग कायल थे।इनके जीवन काल मे पत्रकारिता के कारण क़ई बड़े विवाद भी हुए थे।जिनमें बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री के.बी.सहाय के द्वारा इनकी ख़बर जिसका शीर्षक”गली-गली में शोर हैं-के. बी.सहाय चोर हैं” पर किया गया मानहानि का मुकदमा सबसे चर्चित था।

वयोवृद्ध वरिष्ठ पत्रकार महावीर प्रसाद लाठ का देहांत हो जाने से समाज के पत्रकार, क़ई वरिष्ठ नागरिकों सहित विश्व हिन्दू परिषद एवं बजरंगदल के नेताओं ने गहरा शोक प्रकट किया हैं।विहिप मीडिया प्रभारी विवेक कुमार लाठ(सोनू),विभागमन्त्री बिनोद कुमार लाठ,बजरंगदल ज़िला सयोजक चंदन राज,ज़िला सहमंत्री मनीष भारती, अजय मंडल ने साप्ताहिक समाचारपत्र ‘चिराग’ के सम्पादक महावीर प्रसाद लाठ के निधन पर इसे पत्रकार जगत की सबसे बड़ी अपूर्णीय क्षति बताया है।विहिप नेता विवेक कुमार लाठ(सोनू)ने कहा कि पूर्णिया ज़िले के सबसे बुजुर्ग पत्रकारों में महावीर लाठ का नाम आता था।आज महावीर लाठ के निधन पर सारे पत्रकार जगत सहित समाज के हर तबके में शोक की लहर हैं।हम सभी ईश्वर से इनकी आत्मा के शांति की प्रार्थना करते है।

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