धर्म

बिहार: यहां हर हिंदुओं के घरों से आती है-या हसन,या हुसैन,या अली के नारे,100 वर्षों से हिंदु समुदायों के लोग मना रहे हैं मुहर्रम

KATIHAR: बिहार के सीमांचल में आपसी भाईचारे की मिसाल देखनी हो तो कटिहार में देखने को मिल जायेगा। जिले के हसनगंज प्रखंड के महमदिया हरिपुर गांव में हिंदु समुदायों द्वारा लगभग 100 वर्षों से पूरे अकीदत व एहतराम के साथ मुहर्रम मनाया जाता रहा है। इसको लेकर 1200 आबादी वाला गांव हमेशा सुर्खियों में रहा।

रीति-रिवाज से मनाया जाता है मुहर्रम

इमाम हुसैन का जयकारा और निशान खड़ा करने के साथ फातिहा भी पढ़ा जाता है। इस दौरान हिंदू समुदाय के लोग झरनी गाते हैं और मजार पर चादरपोशी भी करते हैं। सबसे खास कि मुहर्रम में बड़ी संख्या में हिंदू महिलाएं भी शामिल होती हैं। बता दें कि महमदिया हरिपुर गांव में स्थित स्व. छेदी साह का मजार है। इस गांव में तकरीबन सौ वर्षों से मुहर्रम मनाने की परंपरा चली आ रही है।

पूर्वजों ने किया था वादा

स्थानीय ग्रामीणों की मानें तो वकील मियां नाम के शख्‍स इस गांव में रहते थे। उनके पुत्र की किसी बीमारी से मौत हो गई थी। इससे दुखी होकर उन्होंने गांव ही छोड़ दिया, जाते वक्त उन्होंने छेदी साह को इस वादे के साथ अपनी जमीन दे दी थी कि उनके चले जाने के बाद भी ग्रामीण मुहर्रम मानते रहेंगे।ग्रामीणों की मानें तो पूर्वजों द्वारा किए गए इस वादे को निभाने के लिए हिंदू समुदाय के लोग मुहर्रम मनाते आ रहे हैं।

मुहर्रम से गांव में है सुख-समृद्धि

लगभग 100 सालों से भी अधिक समय से यह परंपरा बदस्तूर जारी है। ग्रामीण कहते हैं कि यह परंपरा आगे भी जारी रखेंगे। गांव के निवासियों का कहना हैं कि पूर्वजों द्वारा किए गए वादे को निभाते हुए मुहर्रम मनाने से इस गांव में सुख, शांति और समृद्धि है।

पूरे गांव में घुमाया जाता है ताजिया

ग्रामीणों ने बताया कि मुहर्रम से जुड़ी रीतियों के बारे में बताते हुए कहा कि सप्तमी के दिन यहां उत्‍सव का माहौल होता है। फिर निशान खड़ा किया जाता है, उसके बाद फातिहा पढ़ने के साथ चार दिनों तक पूजा करते हुए ताजिया निशान को गांव में घुमाया जाता है।लेकिन इस बार कोरोना गाइडलाइन का पालन करते हुए साधारण तरीके से यहां मुहर्रम मनाया जा रहा है।

Related posts

विजयादशमी:नीलकंठ के दर्शन से बन जाते हैं सभी बिगड़े काम,आती है सौभाग्य व समृद्धि

Pankaj Jha

चैत्र नवरात्रि का पहला दिन:मां शैलपुत्री की पूजा से मिलता है मनोवांछित फल

Pankaj Jha

अस्ताचलगामी सूर्य को दिया अर्घ्य,छठ घाटों पर सोशल डिस्टेंसिंग का रखा गया ध्यान

Pankaj Jha

Leave a Comment