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पूर्णिया में वायरल फीवर के मरीजों संख्या हुई143,स्वास्थ्य विभाग अलर्ट

पंकज झा
PURNEA : पूर्णिया में वायरल फीवर(Viral Fever)  तेजी से पांव पसारना शुरू कर दिया है।आलम यह है कि दिन प्रति दिन मरीजों की संख्या में भारी इजाफा देखने को मिल रहा है। वायरल फीवर के बढ़ते मरीजों की संख्या के मद्देनजर स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह चौकस है। स्वास्थ्य विभाग से प्राप्त आकड़ों के मुताबिक जिले में अब तक 143 वायरल फीवर के मरीजों की पहचान हुई है। इनमें कुछ मेनिनजाइटिस (Meningitis) के तो कुछ चमकी बुखार के मरीज शामिल हैं।
पूर्णिया के सिविल सर्जन डा एस के वर्मा ने बताया कि जिले के विभिन्न इलाकों से वायरल फीवर के लक्षणों वाले अब तक कुल 143 मरीजों की पहचान की गयी है।जिसमें से 32 मरीजों को राजकीय मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है। मेडिकल कॉलेज में भर्ती वायरल फीवर के 22 मरीजों को स्वस्थ होने के बाद डिस्चार्ज कर दिया गया है।जबकि वायरल फीवर के 10 संभावित मरीजों के ब्लड सैंपल को जांच हेतु पटना भेजा गया है।
सिविल सर्जन डा श्री वर्मा ने बताया कि वायरल फीवर के बढ़ते मरीजों की संख्या के मद्देनजर जिले के सभी अस्पतालों को अलर्ट कर दिया गया है। साथ हीं सभी संभावित मरीजों के ब्लड सैंपल जांच के लिए भेजने का निर्देश दिया गया है।

क्या है वायरल फीवर
विशेषज्ञों के अनुसार वायरल बुखार बहुत संक्रामक रोग है, जिससे कोई भी व्यक्ति किसी भी समय और कहीं भी ग्रस्त हो सकता है। हालाँकि बच्चे और बुजुर्ग इसकी चपेट में अधिक आते हैं। यह बुखार वैसे तो हर मौसम में होता है, लेकिन बरसात में अधिकतर होता है, इसलिए इस मौसम में इसके प्रति विशेष सावधान रहने की जरूरत होती है। आम बोलचाल की भाषा में फ्लू, इंफ्लुएंजा, कॉमन कोल्ड या साधारण सर्दी के बुखार अथवा हड्डी तोड़ बुखार के नाम से पुकारे जाने वाले इस वायरल बुखार के वायरस का एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक साँस के जरिए होता है।
यह है लक्षण
विशेषज्ञों के अनुसार वायरल बुखार  होने  वाले शरीर में कुछ इस तरह के लक्षण दिखते हैं जैसे, गले में दर्द, खांसी, सिर दर्द थकान, जोड़ों में दर्द के साथ ही उल्टी और दस्त होना, आंखों का लाल होना और माथे का बहुत तेज गर्म होना आदि। बड़ों के साथ यह वायरल फीवर बच्चों में भी तेजी से फैलता है।
वायरल फीवर होने पर क्या करें
विशेषज्ञों की मानें तो इसमें ऐंटिबायोटिक नहीं दी जाती। तापमान 102 डिग्री तक रहता है तो हर 6 घंटे में पैरासिटामॉल की 1 गोली मरीज को दे सकते हैं। बच्चों को हर 4 घंटे में दवा दे सकते हैं। 2-3 दिन तक बुखार ठीक न हो तो एक अच्छे हेल्थ एक्सपर्ट से जांच कराएं । इसके  लिए आपको एक अच्छे एक्सपर्ट को तलाश ने जरुरत होगी, लेकिन  अब आपको परेशान होने की बिलकुल  जरूरत नहीं हैं , क्योंकि आपकी इस समस्या का हल भी  आपको ऑनलाइन ही मिल जायेगा।
ऐसे करें बचाव
वायरल बुखार से बचाव के लिए यह जरूरी है कि जब वायरल बुखार की महामारी फैली हो तो भीड़- भाड़ वाली जगहों जैसे स्कूल-कॉलेज, बस, ट्रेन आदि में मुँह और नाक पर साफ कपड़ा या रूमाल रख लें। नाक पर रखने वाले सर्जिकल पैड कीटाणु रहित होते हैं, इसलिए इन्हें लगाना अधिक लाभप्रद रहता है।मौसम के अनुसार कपड़े पहनने चाहिए। सर्दी के मौसम में गरम कपड़े पहनने और मुँह तथा नाक को छोड़कर शरीर के बाकी हिस्से को ढककर रखें। इसके अलावा भोजन प्रोटीन एवं विटामिन युक्त ग्रहण करना चाहिए।

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